Sardar Patel


केजरीवाल तो ठीक ठाक लगते है पर उनके साथियों की हरकते कुछ ठीक नजर नहीं आ रही है - मसलन संजय सिंह का बांग्लादेशी घुसपैठियों/शरणर्थियों के संबंध में उल्टा बयान, प्रशांत भूषण का कश्मीर पर उल्टा बयान - जैसे लगता है देश इनके बाप की खेती है! आज अगर सरदार बल्लभ भाई पटेल जिन्दा होते, तो माथा पीट लेते। आज जिस ३२ लाख वर्ग किमी के देश में वो रह रहे हैं उसको बनाने में पटेल ने कितनी मेहनत की थी, इन गदहों को क्या मालूम? वो कश्मीर को खीच लाये, हैदराबाद के निज़ाम और रजाकारों जिन्होंने समझो युद्ध घोषित कर दिया था उन्हें सैनिक करवाई का मज़ा चखाया, जूनागढ़ का राजा भी ऐसे ही ना नुकुर करता था, त्रवनकोर के दीवान रामास्वामी अय्यर और वहाँ के राजा ने जून 47 को स्वतंत्रता घोषित कर दी थी, उसको भी मजबूर किया -- नहीं तो आज हैदराबाद, तिरुअनंतपुरम, जूनागढ़, श्रीनगर सब या तो किसी और देश की राजधानियां होते या फिर पाकिस्तान के महानगर - इन सबको इकट्ठा कर पटेल ने आजादी के सेनानियों के 'भारत' के सपने को साकार किया था - और इन गधों को कुछ नहीं सूझता - पता नहीं स्कूल में इतिहास पढ़ा था कि नहीं? और पढ़ा भी होगा तो हो सकता है इतिहास के नाम पर वामपंथी प्रोपेगंडा पढ़ा हो।