ढोंग

ढोंग देखिये - पढ़े लिखे बहुत से लोग खुद को धर्म परिवर्तन कर बौद्ध ("जाग्रत व्यक्ति" या "प्रबुद्ध व्यक्ति") कहते है , अपने को भगवान बुद्ध जिन्होंने हिंसा/घृणा त्यागने का सन्देश दिया, का सबसे बड़ा भक्त समझते है, लेकिन यही लोग हिन्दू देवी देवताओं का मजाक उड़ाते हैं, हिन्दू समाज को गाली देते हैं, गीता, वेद, रामचरित इत्यादि को तरह तरह से तोड़मरोड़ कर समाज में घृणा और भ्रम फैलाते हैं, अम्बेडकर को ऊँचा बड़ा बताने के लिए गांधी, पटेल, नेहरू को गलियाते हैं। बुद्ध की नास्तिकता को आस्तिक हिन्दू दर्शन से तुलना कर आस्तिकों का मज़ाक उड़ाते हैं, पर दूसरे ही दिन आप को ये लोग बुद्ध और अम्बेडकर को भगवान मान कर उनके पैरों में दिया और अगरबत्ती जलाते हुए नज़र आते हैं, मत्था टेकते नज़र आते हैं। हिन्दुओं के बीच तो बुद्ध भगवान माने जाते हैं - पर इन झूठे बौद्धों ने हिन्दू देवी देवताओं, पुस्तकों, मिथकों इत्यादि के प्रति दलितों और पिछड़ों के बीच घृणा फैला रखी है। महात्मा बुद्ध ने क्या इसी घृणा और धूर्तता का सन्देश दिया था? बाबा साहब ने क्या इसी घृणा और धूर्तता का सन्देश दिया था?