क्या उत्तर प्रदेश में बीजेपी का बहुमत प्रदेश की स्थिति में सुधार ला पायेगा?

उत्तर प्रदेश में चुनाव के रिजल्ट्स आने के बाद से अब तक कई दिन बीत चुके हैं पर भारतीय जनता पार्टी अभी तक अपने मुख्यमंत्री को नहीं चुन पायी है।  मुख्यमंत्री के पद के लिए कई चेहरे चर्चा में है पर मेरे विचार से उत्तर प्रदेश बीजेपी में कोई भी ऐसा चेहरा नहीं है जिसके पास प्रदेश के भविष्य को लेकर कोई विज़न हो। इन चेहरों के पिछले रिकॉर्ड देखने से भी कुछ पता नहीं चलता। बहुत से लोग योगी आदित्य नाथ को मुख्यमंत्री बनाने के समर्थन में है पर मुझे लगता नहीं कि प्रधानमन्त्री मोदी आदित्यनाथ को ये जिम्मेदारी सौंपेंगे। आदित्यनाथ व्यक्तित्व के भले ही धनी हों, अपने क्षेत्र में भले ही उनका सिक्का चलता हो पर प्रदेश सँभालने के लिए उसकी अर्थव्यवस्था को लाइन पर लाने के लिए एक दूरद्रष्टा की जरुरत है।  देश के विकास के संकेतकों की बेहतर बनाने के का रास्ता उत्तर प्रदेश से गुजरता है जहाँ देश की १६% जनसँख्या रहती है। २० करोड़ से ज्यादा वाले इस प्रदेश में तरक्की का मतलब देश की तरक्की है लेकिन बड़ा सवाल अभी है कि योगी आदित्यनाथ या मनोज सिन्हा या जो भी प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठता है, क्या वो व्यक्ति उत्तर प्रदेश में कुछ त्वरित परिवर्तन ला पायेगा? प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा तंत्र एकदम  लचर अवस्था में है। अगर योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया जाए तो क्या वो इन दो क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकताओं में रख पाएंगे? क्या वे पुलिस की गुंडागर्दी और गुंडों की गुंडागर्दी पर लगाम लगा पाएंगे। क्या वो कृषि में जरुरी परिवर्तन ला पाएंगे? क्या वे परिवहन व्यवस्था में जान फूँक पाएंगे? क्या वे भुखमरी पर लगाम लगा पाएंगे?