वामपंथी चिंतित है कि एक के बाद एक दक्षिणपंथी हर देश में सत्ता पर काबिज होते जा रहे हैं।

दुनिया भर में वामपंथी चिंतित है कि एक के बाद एक दक्षिणपंथी हर देश में सत्ता पर काबिज होते जा रहे हैं। वे इसका दोष दक्षिणपंथियों पर मढ़ देते हैं, पता नहीं क्यों? अगर आप ध्यान से देखें तो दक्षिणपंथियों के सत्ता में आने का मुख्य कारण वामपंथ और उनके साथियों (भारत में सेकुलरिज्म के स्वघोषित झंडाबरदार कांग्रेस और उनके साथी) का अर्थव्यवस्था सहित हर मोर्चे पर विफल होने रहा है। आज तुष्टीकरण, hypocrisy वाम के रग रग में बसी है चाहे भारत हो या कनाडा या फिर फ्रांस या अमरीका। दुनिया में कहीं भी जाइये लाल रंग हरे रंग के मानवता के प्रति किये गए अपराधों पर मानवाधिकारों का पर्दा डालता हुआ मिलेगा इसके बावजूद कि जब भी हरा रंग बहुमत में होता है तो लाल रंग को मौत के घाट उतार देता है। हरे रंग वाले 52 देशों में लाल रंग का नामोनिशान नहीं है और अगर है भी तो काला हो गया होगा। लाल रंग को आत्ममंथन की जरुरत है, न कि दक्षिणपंथ पर आये दिन झूठे आरोप लगाने की और जनता के बहुमत द्वारा चुनी गयी सरकारों के खिलाफ आये दिन धरना देने की। ऐ, लाल झंडा ऊँचा करने वालों, तुम जितने बेबुनियाद आरोप लगाओगे, धरने दोगे, दक्षिणपंथ की सियासी उम्र उतनी ही बढ़ती चली जायेगी। संभल जाओ, तुम्हे मालूम है न, कि लाल रंग का वजूद हरे रंग में आकर मिट कर काला हो जाता है, काला रंग यानी अँधेरे का प्रतीक। क्यों हरे रंग के चक्कर में अपने और इस मानवता को अँधेरे में धकेल रहे हो? जागो, तुम तो समाज को प्रगतिशील और समतामूलक बनाना चाहते हो न, उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्य करो, न कि धरने और अरोपबाजी। हरे रंग के प्रति अगाध प्रेम से तुम्हे कुछ नहीं मिलेगा, कालिख के सिवाय। जागो अगर चाहते हो कि मानवता का भविष्य कहीं अंधकारमय न हो जाये तो।