मंदिर को स्वतंत्र करना ही पड़ेगा।

मुस्लिम आक्रांताओं ने गुजरात में सोमनाथ तोड़ा और लूटा, कश्मीर में मार्तण्ड सूर्य मंदिर तोड़ा, काशी में विश्वनाथ मंदिर तोड़ ज्ञानवापी मस्जिद बनाई, मथुरा में कृष्णजन्मभूमि मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई, अयोध्या में रामजन्मभूमि में मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई, 27 मंदिरों को तोड़ क़ुतुब काम्प्लेक्स में कुव्वतुलइस्लाम मस्जिद बनाई। ये तो बस कुछ उदाहरण दिए हैं ऐसे हज़ारों मस्जिदें हैं जो मंदिरों को तोड़ कर बनाई गयी हैं। क्या भारत के मुसलमानों का यह नैतिक दायित्व नहीं बनता कि वे मंदिरों की जमीन को मस्जिदों से स्वतंत्र करें? क्या कभी मुसलमान इस बात को स्वीकार सकता है कि सऊदी अरब में मुहम्मद के जन्मस्थान से सटकर एक शिवमंदिर बना दिया जाये? यदि नहीं तो काशी मथुरा और अयोध्या में मंदिरों से सटी हुई मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा बनाई मस्जिदों को हिन्दू कैसे स्वीकार सकते हैं? मंदिर को स्वतंत्र करना ही पड़ेगा।