Go get a room, don't do it in public.

आजकल लखनऊ एयरपोर्ट पर पूजा करते हुए एक पंडित जी की फोटो फेसबुक बहुत घूम रही है। फ़ेसबुकिया हिन्दू शेर बहुत खुश हो रहे हैं और कह रहे हैं पहली बार किसी हिन्दू को बेझिझक सार्वजानिक स्थान पर पूजा करते देखा। जबकि यही लोग फ्लाइट में मुसलमानों के नमाज़ पढते दिखाने वाली फोटो पर आपत्ति जताते हैं। इस मुद्दे पर मेरा मानना है कि सार्वजानिक स्थानों पर, रास्तों पर, सडकों पर पूजा पाठ बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ये नियम सभी धर्मों और पंथों पर लागू होना चाहिए। मुल्ले हो या पण्डे या नव बुद्धिस्ट या सिख किसी को भी पब्लिक प्लेस में घेर कर पूजा पाठ नमाज अरदास इत्यादि की बिल्कुल भी छूट नहीं होनी चाहिए। एयरपोर्ट इत्यादि पर सर्वधर्म प्रार्थना का एक रूम होना चाहिए उसी में खूब करो जितनी नमाज़ पढ़नी हैं या पूजा करनी है। सार्वजानिक स्थानों पर रास्ता मत घेरो और नमाज़ पढ़ने के लिए अपनी चटाई मत बिछाओ। अपने इमेजिनरी फ्रेंड से बात करनी है तो घर पर करो या अपने पूजा स्थल पर करो। जैसे अंतरंग सम्बन्ध सार्वजानिक स्थान में नहीं बनाये जाते वैसे ही पूजा पाठ नमाज एकांत में ही अच्छे लगते हैं। Go get a room, don't do it in public.