मैनचेस्टर 2017

वैसे तो मुझे किसी धर्म (रिलिजन), सम्प्रदाय, पंथ, विचारधारा इत्यादि से कोई परेशानी नहीं है, समस्या नहीं है। समस्या तब शुरू होती है जब कोई रिलिजन मुझे (काफिर, नॉन-बिलिवर) उसमें विश्वास न करने के लिए नरक में जलने योग्य या मृत्यु का अधिकारी बताता है। जब कोई धार्मिक (रिलीजियस) पुस्तक नॉन-बिलिवर्स खिलाफ जहर उगलती है। जब वो अपने फोलोवर्स से काफिरों के कत्ल करने का आह्वान करती है। जब कोई पंथ, सम्प्रदाय या विचारधारा दूसरों को नीचा दिखाकर खुद को श्रेष्ठ साबित करना चाहता/चाहती हो। ऐसी किताब, धर्म, पंथ, सम्प्रदाय, विचारधारा के प्रति मेरी घृणा आपको बार बार देखने को मिलेगी। चाहे वो कुरान या बाइबिल के फोलोवर्स हो, या फिर पंडो की पसंदीदा मनुस्मृति के, या फिर दास कैपिटल के दास हो, या फिर अम्बेडकर, साहू या परशुराम के। आततायी किसी भी प्रकार के हो, उनका विरोध करो, जब मौका मिले, कुचल दो। उपचार जरूरी है, नहीं तो एक दिन वो तुम्हें ऊपर पहुँचा देंगे, जैसे उन्होंने परसों मैनचेस्टर में 20 लोगों को ऊपर पहुँचाया है या कुछ दिन पहले रेड कॉरिडोर में सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया।