इंडियन बैंकिंग सिस्टम

आजकल ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जिस दिन इंडियन बैंकिंग सिस्टम के लिए बेहतरीन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता। कभी एटीएम बिगड़ा है तो कभी पैसे नहीं है तो कभी डिमांड ड्राफ्ट बनाने में एक दिन लगा रहे हैं तो कभी कह रहे हैं दूसरे एटीएम से पैसे नहीं निकाल सकते तो कभी मेरी ऑनलाइन access खत्म कर देंगे तो कभी ओटीपी आने में १० मिनिट लगेगा तब तक आपका सेशन एक्सपायर हो जाएगा, तो कभी आपकी ट्रांसफर रिक्वेस्ट प्रोसेस ही नहीं होगी और दो तीन बार करने पर आपका एकांउट ऑनलाइन access ही ब्लॉक कर देंग। और हां हजार तरीके की सर्विस हैं, एक में कुछ एक हज़ार भेज सकते हैं, कुछ में रात के आठ बजे के बाद नहीं भेज सकते हैं कुछ में कुछ, कुछ में कुछ। दूसरी बैंक में भेजना हैं दूसरा ऑप्शन, अपनी बैंक के अपने खाते में भेजना उसके लिए दूसरा ऑप्शन, अपनी बैंक के दूसरे के खाते में भेजना है उसके लिए दूसरा ऑप्शन। सरकारी बैंकों के app देख लोगे तो बेहोश हो जाओगे। मतलब सारा काम गरीबों वाला विकासशील देशों वाला और चले हैं विश्व गुरु बनने। कहते हैं हम सॉफ्टवेयर में सबसे आगे हैं। हैं लीडर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में, और ढंग की वेबसाइट और app भी नहीं बना पा रहे हैं। बताओ ऐसा सिस्टम बना रखा है कि एक पेमेंट रिक्वेस्ट तक सही ढंग से प्रोसेस नहीं कर सकते। ऐसे ही थोड़े ही पूरी दुनिया इन्हें (हिन्दुस्तान को) थर्ड वर्ल्ड कहती है।