गंदे और बेशर्म हिंदुस्तानी

अच्छा, दिल्ली में क्या है, कि जिन लोगों के पास थोड़ा सा भी पैसा है, घरों में कुत्ते पालते हैं - कुत्ते को खिला तो देते हैं - अब खिलाया है तो थोड़ा बहुत निकालेगा भी - पूरे हिंदुस्तान में समस्या खाने की नहीं है, निकालने की है - हिन्दुस्तानियों को कहाँ निकालना है, नहीं मालूम - कहीं भी खोल कर खड़े हो जाते हैं या बैठ जाते हैं - जो खुद करते हैं वही कुत्ते को भी कराते हैं - कुत्ते को सुबह शाम निकल लेंगे लेकर - और सड़क चाहे साफ़ सुथरी हो गन्दी, कुत्ते को जहाँ मन आएगा, मालिक वही उसे करवा देगा - मोदी के स्वच्छ भारत में चार चाँद लगा देगा - और फिर पतली गली अपने घर में घुस जायेगा - ये तो है दिल्ली के पॉश इलाके की कहानी - उन इलाकों की क्या बात करें जहाँ अभी तक आदमी खुद का टॉयलेट नहीं बना पाया है - दुनिया में सबसे गंदे और बेशर्म हिंदुस्तानी ही होते है - इनमे सिविक सेंस नाम की कोई चीज नहीं है - गधे कहीं के - विश्व गुरु बनेंगे!